
*बाल संरक्षण में संवेदनशीलता और एकरूपता पर जोर, भोपाल की राज्य स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए खंडवा सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष प्रवीण शर्मा*

*पॉक्सो और किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर हुआ मंथन, प्रदेश के सभी 55 जिलों के अध्यक्षों ने साझा किए अनुभव*
भोपाल/खंडवा
बाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा शुक्रवार को मध्यप्रदेश काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (MPCST), भोपाल में राज्य स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला आयोजित की गई। “पॉक्सो अधिनियम, 2012 एवं किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रभावी क्रियान्वयन में बाल कल्याण समिति की भूमिका” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में प्रदेश के सभी 55 जिलों की बाल कल्याण समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्य शामिल हुए। खंडवा का प्रतिनिधित्व न्यायपीठ बाल कल्याण समिति, खंडवा के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने किया।
कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश की सभी बाल कल्याण समितियों की कार्यप्रणाली में एकरूपता स्थापित करना, विधिक एवं प्रक्रियागत दक्षता को सुदृढ़ करना तथा “बालहित सर्वोपरि” (Best Interest of the Child) के सिद्धांत को प्रत्येक निर्णय का आधार बनाना था। प्रशिक्षण में पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम, प्रकरण प्रबंधन, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन, विभागीय समन्वय, आयोग की रिपोर्टिंग प्रणाली, अभिलेख संधारण तथा संवेदनशील मामलों के समयबद्ध निराकरण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, मध्यप्रदेश के महासचिव रामेन्द्र सिंह, एमपीसीएसटी के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी, सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीमती सुधा विजय सिंह भदौरिया, आयोग की सदस्य श्रीमती सोनम निनामा एवं श्रीमती अर्चना गुप्ता सहित अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे। आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने बाल संरक्षण से जुड़े प्रत्येक प्रकरण में समयबद्ध, निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यवाही सुनिश्चित करने तथा पॉक्सो प्रकरणों में सपोर्ट पर्सन की पारदर्शी नियुक्ति पर विशेष बल दिया।
कार्यशाला के बाद प्रवीण शर्मा ने कहा कि बाल कल्याण समिति का प्रत्येक निर्णय किसी बच्चे के जीवन, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा होता है। इसलिए प्रत्येक मामले में संवेदनशीलता, निष्पक्षता, विधिसम्मत प्रक्रिया और मानवीय दृष्टिकोण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भोपाल में प्राप्त प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन का लाभ खंडवा जिले में बाल संरक्षण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने में लिया जाएगा, ताकि प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे को समय पर संरक्षण, पुनर्वास और न्याय मिल सके।
उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, न्यायिक संस्थाओं और समाज के समन्वित प्रयासों से ही बच्चों के अधिकारों की प्रभावी रक्षा संभव है। कार्यशाला से प्राप्त अनुभवों को जिले की कार्यप्रणाली में शामिल कर बालहित सर्वोपरि के सिद्धांत को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
राज्य स्तरीय यह कार्यशाला बाल कल्याण समितियों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान, विधिक समझ को मजबूत करने और प्रदेश की बाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक सशक्त एवं बाल-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।











